देवरिया। मुंबई की एक विशेष एनआईए अदालत ने गुरुवार को 2008 मालेगांव ब्लास्ट केस में सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। जिन लोगों को अदालत ने बेगुनाह बताया है, उनमें भाजपा की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित और रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय के नाम शामिल हैं। कोर्ट का फैसला आते ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कोर्ट के फैसले को ‘सत्य की जीत’ बताया।
योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा?
सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि- “मालेगांव विस्फोट केस में सभी आरोपियों का निर्दोष साबित होना “सत्यमेव जयते” की सच्ची मिसाल है। उन्होंने कांग्रेस पर सीधा हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस ने ‘भगवा आतंकवाद’ जैसी झूठी बात फैलाकर देश के करोड़ों सनातन धर्म मानने वालों, साधु-संतों और देशभक्तों की छवि को खराब करने का काम किया। योगी ने कहा कि कांग्रेस को इस घिनौने काम के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।”
18 साल बाद आया कोट का फैसला
इस केस में करीब 18 साल बाद फैसला आया है। स्पेशल एनआईए कोर्ट ने कहा कि जांच में पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए जा सके, इसलिए सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया जाता है। जज एके लाहोटी ने अपने फैसले में यह भी कहा कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं ने आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ बयानबाजी शुरु कर दी है।
क्या था मालेगांव ब्लास्ट?
29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव में रमजान के महीने में एक जबरदस्त बम धमाका हुआ था। इस धमाके में 6 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस केस में एक आरोपी को 2011 में जमानत मिल गई थी, जबकि बाकी छह आरोपियों ने आठ साल जेल में बिताए और उन्हें 2017 में जमानत मिली थी। अब कोर्ट ने सबूतों की कमी की वजह से सभी को बरी कर दिया है।