देवरिया। साल 2024 में आने वाली चैत्र नवरात्रि 9 अप्रैल मंगलवार से शुरू होने जा रही है। इस साल चैत्र नवरात्र पर कई शुभ योग बन रहे है। हर साल नवरात्र की शुरुआत चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि से होती है। आइए जानते हैं इस बार चैत्र नवरात्रि में पहले दिन कलश या घट स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त कब से कब तक रहेगा। आपको बता दें नवरात्रि में इस बार 4 राजयोग का संयोग रहने वाला है। साथ ही इस दिन सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग दोनों का शुभ संयोग रहेगा। हालांकि, इस दिन कुछ समय के लिए पंचक भी हैं।
घट स्थापना शुभ मुहूर्त
नवरात्र की शुरुआत मंगलवार 9 अप्रैल में हो रही है। लेकिन सुबह 7 बजकर 32 मिनट तक पंचक रहने वाला है। इसलिए घट स्थापना पंचक हटने के बाद ही करना होगा। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि 9 बजकर 11 मिनट तक अशुभ चौघड़िया रहने वाला है। इस प्रकार कलश स्थापना के लिए शुभ चौघड़िया 9 बजकर 12 मिनट से 10 बजकर 47 मिनट तक है। इसके बाद इससे भी बेहतर मुहुर्त 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। यह समय अभिजीत मुहूर्त कहलाएगा। अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना या घट स्थापना करना शुभ माना गया है। इस समय वैघृत योग और अश्विनी नक्षत्र का भी संयोग रहने से नवरात्र पूजा के लिए संकल्प लेना घटस्थापना, अखंड दीपक का संकल्प लेना आदि कर्म करना उत्तम और शुभ फलदायी होगा।
इस तरह करें घट स्थापना
नवरात्र में घट स्थापना का बहुत महत्व होता है, जिसमें छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना होता है। शास्त्रों में घट स्थापना को लेकर कई नियम बताए गए हैं। जैसे-
कलश स्थापना के लिए हमें सोने, चांदी, तांबे या फिर मिट्टी से बने कलश का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
कलश की स्थापना या तो उत्तर दिशा में या फिर पूर्व दिशा में ही करनी चाहिए। स्थापना से पहले सबसे पहले उस स्थान को गंगाजल छिड़क कर साफ कर लें।
इसके बाद कलश में सप्त मृत्तिका, सुपारी, सिक्का, सुगंध, सर्व औषधी, कौड़ी, शहद, गंगाजल, पंच पल्लव, पीपल, आम बरगद, गूलर और पाखर के पल्लव यदि उपलब्ध न हों तो आम के पल्लव डाल लें।
सिंदूर से कलश में स्वास्तिक लगाएं। लाल रंग के कपड़े में नारियल लपेटकर कलश के ऊपर रख दें।
कलश के ऊपर मिट्टी के बर्तन में धान या चावल डालकर उसके ऊपर ही नारियल स्थापित करें।
पूजा के बाद वेदी के ऊपर जौ को बो दें।
