देवरिया। कहते हैं बेटियां अपने पिता की जान होती हैं। किसी भी बेटी के लिए उसके पिता सबसे बड़े हीरो होते हैं और किसी भी पिता के लिए उसकी बेटी गौरव होती है। पिता खुद चाहे किसी भी परिस्थिति में रहे अपनी बेटियों को हर संभव सुविधाएं देने की कोशिश करता है। ऐसे ही एक पिता हैं ऑटो चालक अजय राय। अगर आप भोपाल में हैं और किसी ऑटो में आपको एक प्यारी और मासूम बच्ची की तस्वीर नजर आती है तो समझ लीजिए यह ऑटो अजय की है और वह सुंदर तस्वीर उनकी बेटी की।



अजय को है बेटी के भविष्य की चिंता

अजय पेशे से ऑटो चालक हैं और उनकी हर किसी के लिए प्रेरणा है। हर पिता की तरह वो भी अपनी बेटी किसी राजकुमारी से कम नहीं समझते और प्यार से बेटी का नाम परी रखा है। परी अभी बहुत छोटी है लेकिन अजय अभी से उसे उच्च शिक्षा देकर उसका भविष्य अच्छा बनाने की तैयारी कर रह हैं। अपनी बेटी को अच्छी से अच्छी परवरिश देना चाहते हैं अजय। जो भी शख्स अजय की ऑटो में बैठता है मासूम परी का चेहरा देख उसके बारे में पूछ ही बैठता है। परी की तस्वीर अजय के ऑटो की पहचान बन गई है। अपनी सोच से अजय ने समाज में एक बड़ा उदाहरण पेश किया है।


सरकार की पहल से बदली हैं परिस्थितियां

केंद्र और अलग-अलग राज्यों की सरकारों ने भी पिछले कुछ सालों में बेटियों की पढ़ाई, कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए योजनाएं बनाई। योजनाओं के साथ इन योजनाओं को लागू करने और लोगों को जागरूक करने की तरफ भी काम किया गया है। इसका असर अब समाज में दिखाई देने लगा है। सरकार की योजाओं की मदद से लोग बेटियों को बढ़ाने, उनका करियर संवारने और उन्हें अच्छा भविष्य देने की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

आपकी भी है बेटी तो इन योजनाओं का उठाएं लाभ-


सुकन्या समृद्धि योजना-
केंद्र द्वारा चालू की गई इस योजना के तहत माता-पिता अपनी बेटी के 10 वर्ष के होने से पहले बचत खाता खुलवाते हैं। अभिभावक द्वारा यह खाता बैंक या पोस्ट ऑफिस के माध्यम से खुलवाया जा सकता है। इस खाते में माता-पिता हर साल 250 रुपए से लेकर डेढ़ लाख रुपए तक जमा करा सकते हैं। इस जमा राशि पर सरकार की तरफ से ब्याज दिया जात है। इस समय सुकन्या खाते में जमा की गई राशि पर 7.6% की दर से ब्याज दिया जा रहा है। योजना के तहत एक परिवार से 2 बेटियों को लाभ मिल सकता है। बेटी जब 18 साल की हो जाए तो खाते से 50 प्रतिशत राशि निकाल कर बेटी की पढ़ाई या शादी में लगाया जा सकता है।

लाड़ली लक्ष्मी योजना-
लाड़ली लक्ष्मी योजना मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार द्वारा साल 2007 में चालू की गई थी। लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत प्रदेश सरकार बेटियों के जन्म से लेकर उसकी उच्च शिक्षा तक के लिए आर्थिक सहायता करती है। बेटियों के जन्म पर सरकार 11 हजार रुपये की मदद करती है और शादी से पहले एक लाख रुपये दिए जाते हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बेटियों की परवरिश में पड़ने बाले भार को कम करना है ताकी बेटियों के जन्म दर में बढ़ोतरी आए और कन्या भ्रूण हत्या ना हो।

बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ योजना-
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी ने 22 जनवरी, 2015 को हरियाणा के पानीपत में की थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य लिंगानुपात बढ़ाना है। इस योजना के जरिए से ना सिर्फ बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है बल्कि उन्हें हायर एजुकेशन के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है। यह योजना बालिकाओं की सुरक्षा और शिक्षा को सुनिश्चित करती है। इस योजना ने काफी हद कर बेटे और बेटियों के बीच के अंतर को कम किया है।