शिवांगी सिंह
योगी आदित्यनाथ, जिनके काम और पहचान ने कई मौकों पर चौंकाया है। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल ज़िले में जन्मे योगी आदित्यनाथ का महंत बनने से पहले नाम अजय सिंह बिष्ट था। साल 1998 से 2017 तक लोकसभा के सदस्य रहे इस राजनेता के हिस्से लगातार दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने का रिकॉर्ड है। सख्त छवि और कड़क अंदाज वाले इस सीएम को लोगों का बड़ा समर्थन हासिल है। छात्र राजनीति से सफर शुरू करके नेशनल पॉलिटिक्स में सिक्का जमाने वाले सीएम योगी अपना 50वां जन्मदिन मना रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सत्ता और विपक्ष के तमाम लीडर्स ने जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं।
और छा गया योगी आदित्यनाथ का नाम…
साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को अपार जन समर्थन मिला। 404 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने 312 पर विजय पताका लहराई। उस वक्त मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की लिस्ट में दूर-दूर तक गोरखपुर से तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ का नाम नहीं था। अचानक ये ख़बर सुर्खी बनी कि भगवा पहनकर संसद में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने वाला बीजेपी का ये फायरब्रांड नेता उत्तर प्रदेश की कमान संभालने जा रहा है। उस प्रदेश की कमान, जिसे पार किए बिना केंद्र का रास्ता पूरा नहीं होता।
अपराधियों में दिखा ‘बुलडोजर बाबा’ का खौफ
योगी आदित्यानाथ ने लोगों की शंकाओं को अपने पहले कार्यकाल में दूर किया। कानून व्यवस्था, करप्शन, गुंडाराज, माफियाराज पर ऐसा चाबुक चलाया कि कभी वे ‘बुलडोजर बाबा’ के नाम से ख़बरों में छाए रहे, तो कभी सरेंडर करने वाले अपराधियों में उनका ख़ौफ साफ दिखा। प्रशासन और पुलिसिंग भी बेहतर हुई, जिसका परिणाम 2022 के विधानसभा चुनावों में देखने को मिला। बीजेपी ने फिर लोगों का दिल जीता और बहुमत पाकर विधानसभा पहुंची। सारे मिथकों को झुठलाते हुए योगी आदित्यनाथ ने दुबारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान संभाली।
योगी आदित्यनाथ के सफर की खास बातें-
• उत्तराखंड में जन्मे, वहीं से शिक्षा प्राप्त करने के दौरान ही योगी आदित्यनाथ राजनीति में सक्रिय हो गए थे। वे विभिन्न राष्ट्रवादी आंदोलनों से भी जुड़े रहे।
• राम मंदिर आंदोलन के प्रति उनका झुकाव था। 22 साल की उम्र में उन्होंने सांसारिक जीवन छोड़कर संन्यास लिया। वे संत बन गए। उन्हें नया नाम योगी आदित्यनाथ मिला। वे गोरखनाथ मठ के मुखिया महंत अवैद्यनाथ के शिष्य थे। इससे पहले वे कई बार महंत अवैद्यनाथ से मिल चुके थे और गोरखपुर आ चुके थे।
• योगी आदित्यनाथ सबसे कम उम्र में लोकसभा पहुंचने वाले सदस्यों में से एक हैं। 1998 में पहली बार वे गोरखपुर से सांसद चुने गए। उस वक्त उनकी उम्र सहज 26 साल थी। इसके बाद वे 1999, 2004, 2009 और 2014 में भी लगातार सांसद चुने गए।
• सितंबर 2014 में उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ के समाधि लेने के बाद वह गोरक्षपीठाधीश्वर बने। योगी आदित्यनाथ हिंदू युवा वाहिनी के संस्थापक भी हैं।
• उत्तराखंड के साधारण परिवार के बेटे योगी आदित्यनाथ की मां चाहती थीं कि वे सरकारी नौकरी करें। वहीं वामपंथी संगठन से जुड़े होने की वजह से उनके जीजा ने उन्हें भी वाम विचारधारा से जुड़ने का ऑफर दिया था।
• कॉलेज के दिनों में ही योगी आदित्यनाथ एबीवीपी के सदस्य बन गए थे। वे एबीवीपी के लिए प्रचार किया करते थे। सचिव पद के लिए टिकट न मिलने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे।
योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली उत्तर प्रदेश में लोगों को पसंद आ रही है। सुधरी कानून व्यवस्था और कम हुए गुंडाराज की वजह से जनता को राहत मिली है। लोगों का अपने ‘महाराज’ पर भरोसा बढ़ा है।

पहला चुनाव हारे लेकिन मुड़ कर पीछे नहीं देखा, राष्ट्रीय राजनीति में ऐसे जमा ‘महाराज’ का सिक्का
योगी आदित्यनाथ, जिनके काम और पहचान ने कई मौकों पर चौंकाया है। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल ज़िले में जन्मे योगी आदित्यनाथ का महंत बनने से पहले नाम अजय सिंह बिष्ट था। साल 1998 से 2017 तक लोकसभा के सदस्य रहे इस राजनेता के हिस्से लगातार दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने का रिकॉर्ड है। सख्त छवि और कड़क अंदाज वाले इस सीएम को लोगों का बड़ा समर्थन हासिल है। छात्र राजनीति से सफर शुरू करके नेशनल पॉलिटिक्स में सिक्का जमाने वाले सीएम योगी अपना 50वां जन्मदिन मना रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सत्ता और विपक्ष के तमाम लीडर्स ने जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं।