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Aja Ekadashi Vrat Katha: सभी कष्टों को दूर करती है ये अजा एकादशी व्रत कथा

देवरिया। बारह महीने पड़ने वाली एकादशी व्रत को सनातन धर्म में में काफी श्रेष्ठ माना गया है। विज्ञान के हिसाब से भी एकादशी का व्रत शरीर और स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना गया है। सालभर में कई एकादशी आते हैं जिनमें से कुछ का विशेष महत्व होता है। उन्हीं में से एक है ‘अजा एकादशी’ (Aja Ekadashi Vrat Katha)। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी अजा एकादशी होती है। आइए जानते हैं अजा एकादशी क्यों इतनी महत्वपूर्ण होती है।

कथा सुनने से पूरा होता है व्रत

अजा एकादशी जिसे जया एकादशी भी कहते हैं आज यानी 19 अगस्त मंगलवार बनाई जा रही है। कहा जाता है (Aja Ekadashi Vrat Katha) अजा एकादशी का फल व्रत और पारण के साथ ही इसकी कथा सुनने से मिलता है। पुराणों में दिए गए वर्णन के अनुसार स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अजा एकादशी व्रत की कथा युधिष्ठिर को सुनाई थी। आपको बता दें एकादशी के व्रत में किसी भी तरह के अनाज का उपयोग करना वर्जित माना जाता है। व्रत के पारण के लिए फलाहारी आहार ही  लिया जाता है। वहीं व्रत के एक दिन पहले और व्रत के बाद द्वादशी के दिन लहसुन प्याज वाले तामसी भोजन भी वर्जित होता है।

अजा एकादशी व्रत कथा

धार्म ग्रंथों में दिए अजा एकादशी व्रत (Aja Ekadashi Vrat Katha)की कथा इस प्रकार है- सतयुग में हरिश्चंद्र नाम के राजा हुआ करते थे जो बहुत ही महान, सत्यप्रिय और दयालु  माने जाते थे। लेकिन समय का पासा कुछ ऐसा पलटा की एक समय में उन्हें अपनी राज्य के साथ पूरी धन-संपत्ति को खोना पड़ा। राजा एक चांडाल के घर दास बनकर अपना जीवन बिताने लगे। एक दिन राजा से गौतम ऋषि मिले और उन्होंने राजा का यह हाल देखा। तब गौतम ऋषि ने राजा को इन सभी कष्टों से मुक्ति पाने का उपाय बताया। ऋषि ने उन्हें अजा एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा भाव से करने की सलाह दी। गौतम ऋषि ने बताया की (Aja Ekadashi Vrat Katha) एकादशी को पूरे विधिपूर्वक करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं  और दुख से मुक्ति मिलती है।

राजा ने गौतम ऋषि की बात मानी और पूरी आस्था और विधि से अजा एकादशी का व्रत, पूजा पाठ और पारण किया। ऋषि के कहे अनुसार व्रत के प्रभाव से राजा के सभी दुख दूर हो गए उनके सभी पाप मिट गए और उन्हें उनका राज्य, संपत्ति और परिवार सबकुछ वापस मिल गया।

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