देवरिया। हर साल चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को प्रभु श्री राम का जन्मोत्सव राम नवमी के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन इस बार की राम नवमी की शोभा और रौनक अलग ही होगी। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह पहली राम नवमी होगी। इसके लिए अयोध्या में भव्य तैयारियां चल रही हैं। राम मंदिर में राम लला के श्रृंगार, भोग से लेकर पूजा तक के लिए खास तैयारियां की गई हैं। आइए जानते हैं आने वाली राम नवमी कितनी विशेष होने वाली है।



पीले रेशमी पोषाक धारण करेंगे राम लला

अयोध्या में श्रीराम का बाल रूप विराजित है। पूरे 500 साल के इंतजार के बाद अयोध्यावासियों को राम लाल का जन्मदिन धूमधाम से मनाने का मौका मिल रहा है। 17 अप्रैल को राम नवमी पर राम लला का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। सुबह उत्थान आरती के बाद श्रीराम को रेशम की पीली पोषाक पहनाकर विशेष श्रृंगार किया जाएगा। सुबह 5 बजे से राम लला के दर्शन किए जा सकेंगे। दोपहर 12 बजते ही श्री राम का जन्म होगा और भव्य जन्मोत्सव मनाया जाएगा। आपको बता दें नवरात्र के पहले दिन से ही भगवान राम को अलग-अलग तरह के वस्त्र पहनाकर श्रृंगार किया जा रहा है।

12 बजे होगा सूर्य तिलक

रामनवमी के दिन अयोध्या के मंदिर में होने वाला राम लला का सूर्य तिलक उस दिन सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहेगा। दोपहर के ठीक 12 बजे सूर्य की किरणें राम लला के मस्तक पर पड़ेंगी और राम लला का सूर्य अभिषेक होगा। सूर्य अभिषेक के लिए पूरी तैयारियां की जा चुकी हैं। रिहर्सल भी सफलतापूर्वक हो चुका है।


राम लला के लिए बनेगा 56 भोग
राम लला के जन्मस्थान अयोध्या में सदियों बाद राम लला के जन्म का उत्सव मनाने का मौका आया है। इस अवसर पर सारी तैयारियों के साथ ही भोग के लिए भी विशेष पकवान बनेंगे। जन्मोत्सव के बाद 56 भोग का प्रसाद चढ़ाया जाएगा। 56 भोग में मेवे, मिष्ठान और फलों के साथ सात्विक पकवान होंगे। हर शुभ और विशेष अवसर पर प्रभु को 56 भोग का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

श्री राम के जन्मोत्सव का त्योहार है रामनवमी

त्रेता युग में चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन पुनर्वसु नक्षत्र के कर्क लग्न में अयोध्या के सूर्यवंशी राजा दशरथ के पुत्र मर्यादा पुरुषोत्म श्री राम का जन्म हुआ था। श्री राम भगवान विष्णु के अवतार हैं। प्रभु श्री राम के जन्म का उत्सव हर साल राम नवमी के रूप में मनाया जाता है। राम नवमी को व्रत करना भी शुभ फलदायी माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों में डुबकी लगाने से सारे पाप धुल जाते हैं।