केरल के एर्णाकुलम टाउन हॉल में जुड़वां लोगों का तीसरा सम्मेलन हुआ। इसमें 137 जुड़वां और 4 ट्रिपलेट इकट्ठा हुए।
इनमें 2 साल के छोटे बच्चे से लेकर 72 साल के बुजुर्ग शामिल थे। कुछ विदेशों से भी आए, लेकिन सभी भारतीय थे।
यहां आए जुड़वां और ट्रिपलेट अपने लिए अपने जैसा ही जुड़वां या ट्रिपलेट हमसफर भी तलाश रहे थे।
एक सोशल मीडिया ग्रुप बना है। इसमें अब तक 800 से ज्यादा जुड़वां और 10 ट्रिपलेट शामिल हो चुके हैं।
एक सोशल मीडिया ग्रुप बना है। इसमें अब तक 800 से ज्यादा जुड़वां और 10 ट्रिपलेट शामिल हो चुके हैं।
केरल के एक गांव कोदिन्ही को भारत का "जुड़वां गांव" कहा जाता है। यहां के 2,000 परिवारों में 400 से अधिक जुड़वां बच्चे जन्मे हैं।
इस गांव को वैज्ञानिक "आनुवंशिक सोने की खान" कहते हैं। इसकी वजह ढूंढ़ने की कोशिश जारी है, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका।
दुनिया में औसतन 1,000 बच्चों पर 9 जुड़वां बच्चे पैदा होते हैं। कोडिन्ही में 1,000 बच्चों पर 45 होते हैं।