देवरिया। देश की जनता और राम भक्तों के बहुप्रतिक्षित अनुष्ठान की शुरुआत हो चुकी है। 16 जनवरी से अगले 7 दिनों तक अलग-अलग अनुष्ठान किए जाएंगे। काशी के विद्वान पंडितों ने सरयू नदी में स्नान कर अनुष्ठान की शुरुआत की। अनुष्ठान का आयोजन विवेक सृष्टि आश्रम में किया जा रहा है, जिसमें मुख्य यजमान डॉ अनिल मिश्रा और राम लला की मूर्ति बनान वाले अरुण योगीराज भी मौजूद रहे।
16 जनवरी- प्रायश्चित्त और कर्मकूटि पूजन किया गया।
17 जनवरी- मूर्ति का परिसर प्रवेश
18 जनवरी- तीर्थ पूजन, जल यात्रा, जलाधिवास और गंधाधिवास
19 जनवरी (सुबह)- औषधाधिवास, केसराधिवास, घृताधिवास
19 जनवरी (शाम)- धान्याधिवास
20 जनवरी (सुबह)- शर्कराधिवास, फलाधिवास
20 जनवरी (शाम)- पुष्पाधिवास
21 जनवरी (सुबह)- मध्याधिवास
21 जनवरी (शाम)- शय्याधिवास
इनकी उपस्थिति में होगी प्राण-प्रतिष्ठा
प्राण प्रतिष्ठा भारत के आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूजनीय सरसंघचालक मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में होगी।
भारतीय आध्यात्मिकता, धर्म, संप्रदाय, पूजा पद्धति, परंपरा के सभी विद्यालयों के आचार्य, 150 से अधिक परंपराओं के संत, महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, श्रीमहंत, महंत, नागा सहित 50 से अधिक आदिवासी, गिरिवासी, तातवासी, द्वीपवासी आदिवासी परंपराओं के प्रमुख व्यक्तियों की कार्यक्रम में उपस्थिति रहेगी, जो श्री राम मंदिर परिसर में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में उपस्थित होंगे।
ये लोग पहली बार होंगे शामिल
भारत के इतिहास में प्रथम बार पहाड़ों, वनों, तटीय क्षेत्रों, द्वीपों आदि के वासियों द्वारा एक स्थान पर ऐसे किसी समारोह में प्रतिभाग किया जा रहा है। यह अपने आप में अद्वितीय होगा।
देशभर से आए उपहार, नेपाल से आया खास भार
गर्भ-गृह में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के पूर्ण होने के बाद, सभी को दर्शन कराया जाएगा। श्री रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए हर जगह उत्साह का भाव है। इसे अयोध्या समेत पूरे भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाने का संकल्प किया गया है। समारोह के पूर्व विभिन्न राज्यों के लोग लगातार जल, मिट्टी, सोना, चांदी, मणियां, कपड़े, आभूषण, विशाल घंटे, ढोल, सुगंध इत्यादि के साथ आ रहे हैं। उनमें से सबसे उल्लेखनीय थे माँ जानकी के मायके द्वारा भेजे गए भार (एक बेटी के घर स्थापना के समय भेजे जाने वाले उपहार) जो जनकपुर (नेपाल) और सीतामढ़ी (बिहार) के ननिहाल से अयोध्या लाए गए। रायपुर, दंडकारण्य क्षेत्र स्थित प्रभु के ननिहाल से भी विभिन्न प्रकार के आभूषणों आदि के उपहार भेजे गए हैं।
