देवरिया। कहते हैं ना जब दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा और मन में भरपूर आत्मविश्वास हो तो इंसान कुछ भी कर सकता है, मुश्किल से मुश्किल मुकाम को पा सकता है। ऐसे कुछ मजबूत इरादे वाली हैं हरमीत कौर, जिन्होंने 42 साल की उम्र में देश सेवा करने की ठानी है। हरमीत कौर को अपनी पति की शहादत के बाद सशस्त्र बल में भर्ती होने का मौका मिला, जिसे उन्होंने सहज ही स्वीकर कर लिया। उनके साथ शहीद पति का असीम प्रेम और देश भक्ति की निस्वार्थ भावना ही है, जिसके दम पर उन्होंने यह फैसला लिया है।

शिक्षिका की नौकरी छोड़ ज्वॉइन की आर्मी
ऐसा नहीं है कि हरमीत के सामने और कोई दूसरा विकल्प नहीं था। हरमीत पेशे से शिक्षिका थीं। वो चाहतीं तो इस नौकरी से जीवन भर अपनी और अपनी 16 साल की बेटी का जीवन चला सकती थीं। लेकिन उन्होंने शिक्षिका की आसान नौकरी को छोड़कर आईटीबीप में भर्ती होना चुना। जिस रास्ते को चुनने से पहले कोई इंसान हजार बार सोचेगा, हरमीत कौर ने उम्र के इस पड़ाव पर अपने लिए इस अग्निपथ को चुना है। अपने पति के अधूरे कर्तव्य को पूरा करने के लिए उन्होंने ITBP की कठिन ट्रेनिंग भी शुरु कर दी है। हरमीत कौर को ट्रेनिंग देने वाले अधिकारी भी उनके जज्बे को सलाम कर रहे हैं।

110 किलो वजन और चोटिल घुटने के साथ शुरु की ट्रेनिंग

हरमीत कौर ने जब अपनी ट्रेनिंग शुरू की तब उनका वजन 110 किलो था। कुछ समय पहले हुए एक एक्सीडेंट के कारण उनके घुटने में भी समस्याएं थी। ज्यादा वजन और घुटने में समस्या होने के कारण ट्रेनिंग की शुरुआत में वो बमुश्किल 10 कदम ही दौड़ लगा पा रही थीं। उनके साथ ट्रेनिंग लेने वाले भी चिंतित थे कि हरमित की ट्रेनिंग कैसी पूरी होगी। लेकिन हरमीत जरा भी नहीं घबराईं। उन्होंने महज डेढ़ महीने की ट्रेनिंग में अपना 15 किलो वजन कम कर लिया। हरमीत ने हाथ में हथियार और पीठ पर 10 किलो वजन लादकर 15 किलोमीटर की दौड़ लगाने में सफल हो गईं।

ITBP ने सोशल मीडिया पर पोस्ट की उनकी कहानी

ITBP ने खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स में हरमीत कौर की कहानी शेयर की है। वीडियो में शायद हरमीत को ट्रेनिंग देने वाली महिला अधिकारी की आवाज है जो उनके बारे में बता रही हैं कि- “हरमीत कौर अपने शहीद पति की जगह रिक्रूट की गई थीं ट्रेनिंग की शुरुआत में उनका वजन 110 किलो था और सभी को उनकी ट्रेनिंग पूरी हो पाने पर शंका थी। पर मुझे भरोसा था कि वो कर लेंगी। मैं उनके पास गई और मैंने कहा चलते रहिए, भागते रहिए। ट्रेनिंग का संबंध दूसरी चीजों की अपेक्षा मानसिक रूप से मजबूत होने से ज्यादा है। मैंने हरमीत से कहा मुझे आपका सपोर्ट चाहिए, एक डील करते हैं आप मुझे अपना 70 प्रतिशत दीजिए बाकी 30 प्रतिशत मेरी तरफ से संभाल लिया जाएगा। डेढ़ महीने की ट्रेनिंग के बाद हरमीत ने वेपन, पीठ पर 10 किलो वजन और डबल मॉड्यूल सोल जूतों के साथ 15 किलोमीटर की दौड़ पूर कर ली। इस दौड़ के पहले दिन मैंने लंबी दूरी की दौड़ और हाइड्रेटेड ड्रिल्स के बारे में विस्तार से जानकारी दी थी। जैसी ही हरमीत ने अपनी दौड़ पूरी की मेरा दिल खुशी और गर्व से भर गया। हरमीत हर दिन के साथ बेहतर हो रही हैं।”